शनिवार, 4 अप्रैल 2020

लघुकथाएं

गद्य - क्षणिका
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*******भावना******
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पाठशाला छुट गयी । विद्यलय के सहपाठियों का साथ छुट गया ! कही से खबर मिली 'विनीता' ने शादी कर ली है ! मै भी विवाह के बंधन मे बन्ध गया !
ख़बरे आती रही, ख़बरे जाती रही !
एक समारोह मे आखिर विनीता से मुलाक़ात हो ही गई !
नमस्ते ! मै बोला ।
विनीता चौक गई, नमस्ते ! बहुत दिन बाद भेट हुई है । वह बोली ।
उसकी खाली मांग, और माथे को निहारकर, मैंने एक दीर्घ श्वास छोड़ी, मुंह से निकला बहुत बरसो बाद भेट हुई है !
* उदय श्री. ताम्हणे 
शिवाजी नगर, भोपाल
@मौलिक एवं स्वरचित



**********लघुकथा **************
********* भरोसा ***************

'अरे ! वीरू की माँ, काहे फ़िकर करे हो ! तेरे पेट से जन्मा है, भरोसा रख बेटे पर !'
सज्जन सिंह ने अपनी पत्नी से कहा !
'ना ! अब न बचूंगी !'
वह पेट दर्द से कराह रही थी !
माता - पिता ने अपने बेटे का व्यवसाय ज़माने के लिए,पूरी ज़मीन बेच कर, राशि अपने बेटे को दे दी थी ! अब उनका आय को कोई साधन नहीं था !
कुछ दिनों तक बेटे ने परवरिश की फिर न जाने क्या सूझी की मंदिर के पास एक झोपडी बना कर उन्हें वहां छोड़ आया !
तब से वीरू की माँ की नींद उड़ गयी थी !
सज्जन सिंह के ढाढ़स का उनकी पत्नी पर कोई विशेष प्रभाव नहीं पड़ा !
'पेट का दर्द मेरी जान ले के ही छोड़ेगा ! खैराती अस्पताल वाले क्या समझे है ?'
गैराज से गाड़ी निकालते हुए, वीरू ने माँ की आवाज सुन ली, खैराती अस्पताल का जिक्र आया तो उसके "हृदय में हलचल" हुई, डाक्टर से समय लिया !
वीरू झोपड़ी में आया और माँ से बोला " तैयार हो जा माँ, आयुष्मान अस्पताल में डॉक्टर श्रवण कुमार से चेकअप कराना है !"

*उदय श्री. ताम्हणे
भोपाल
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लघुकथा
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कही ख़ुशी कही मायूसी
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रेल्वे स्टेशन पर गाडी के रूकते ही बबलू जिद करने लगा ।
मम्मी आईस्क्रीम खाना है ।
माँ ने 50 रुपये का नोट पर्स से निकाल कर हाथ मे थमा दिया ।
" अंकल ! मैगो फ्लेवर आईसक्रीम दिजीए।
आईसक्रीम वाले ने नोट जेब के हवाले किया ।
"मैगो फ्लेवर खतम हो गया है, वनीला, आरेन्ज ले लिजीए।
"नहीं ! मुझे मैगो फ्लेवर ही चाहिऐ ।"
आईसक्रीम वाला : "आरेन्ज फ्लेवर भी अच्छा है । खा कर देखो राजा ।"
"ठीक है, दे दो ।"
खाते ही बबलू बोला "अरे! यह तो एकदम घटिया है।"
कंधे उचकाकर मुँह बिचकाया और आईसक्रीम डस्टबीन मे फेक दी ।
कचरा बिनने वाले बच्चे की उस पर नजर पड गयी, उसने लपक कर आईसक्रीम उठा ली ।
अब बबलू मायूस था और वह बच्चा खुश।

लघुकथा उदय श्री. ताम्हणे, भोपाल ।
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*********लघुकथा ********
***********आँसू ****************

टन, टीन, टन मंदिर के घंटे की आवाज !
रामू झटपट उठ बैठा ! बड़ी-सी थाल मे आटा गूँथा ! चूल्हा जलाकर तेल की कड़ाही उसपर रखी ! आटे से फुलकीया बनाई और गर्म तेल से अपना हाथ बचाते हुये उसमे एक-एक फुलकी डालने लगा ! कड़ाही मे फुलकीया फुल-फुल जा रही थी ! डलिया मे उनको जमाया !
मटके के पानी मे तैयार किया अपना स्वादिष्ट मसाला घोला, उसमे एक नींबू काट कर निचोड़ा !
अब रामू चल पड़ा सपने बुनते हुए ! आज नेता जी की चुनावी सभा मे सारी फुलकीया हाथो हाथ बिकना है !
रामू सभा स्थल के पास पहुँचकर खोमचा लगा कर बैठ गया था !
मंच पर नेता जी चढ़े ! तालियों की गड़-गड़ाहट हुई ! अचानक कही से एक जूता उछला विजय कुमार के चश्मे से टकराया और चश्मे सहित मंच पर आ गिरा ! चश्मे की खरोच से उनकी नाक लाल हो गई थी ! विजय कुमार, मुर्दाबाद ......के नारों के साथ काले-काले पताके लहराने लगे !
प्रशासन माइक पर भीड़ को तितर-बितर करने के लिए आँसू गेस छोडने की घोषणा करने लगा !

*उदय श्री. ताम्हणे, भोपाल ।
***************************************** उदय श्री. ताम्हणे
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************* जन्म कुंडली *********
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रीतिका के पिता अपनी लाडली बिटिया के लिए वर की तलाश में थे | एक विवाह योग्य यु क का पता लगते ही वे उसके माता पिता से मिलने गए | उन्होंने युवक के पिता को अपने आने का उद्देश्य बताया | वर के पिता ने बात को आगे बढ़ाते हुए उनसे पूछा क्या आपके पास रीतिका की जन्म कुंडली है ?
रीतिका के पिता ने जी हाँ कहते हुए तुरंत जन्म कुंडली उनके सामने रख दी | साथ ही उन्होंने एक शर्त भी रखीं |
रीतिका की जन्म कुंडली , वर की जन्म कुंडली के साथ - साथ वर के माता - पिता की जन्म कुंडली से भी मिलाई जाएगी |
क्योकि रीतिका के पिता नहीं चाहते की उनकी लाडली को लाखो रुपये खर्च करने के बाद भी ससुराल में किसी बात कोई तक़लीफ़ हो |

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