अपने साहित्यिक जीवन के शुरुआती दौर से मै जिनकी लघुकथाएं अनवरत पढता आ रहा हूँ, उनमे एक नाम है
"अनिल शूर आजाद"
इनकी यह बात कि लघुकथा लघु होना चाहिए मुझे सार्थक लगती है।
यहाँ फेसबुक समूह
"किशोरी लघुकथा"
और
"लघुकथा लिखिए" से उनकी चुनिंदा लघुकथाएँ पढ़िए : -
डॉक्टर श्री अनिल शूर आजाद










