शनिवार, 20 फ़रवरी 2021

लघुकथा संबंधित पुस्तक

   



संग्रह    सरल व्यक्तित्व के स्वामित्व लिए पवन शर्मा की आंचलिक शब्दों से बुनी हुई लघुकथाओं का गुलदस्ताॅ है। लघुकथाएँ  पहली बार,  यह पारी ही तो है!  टूटने पर, लाचारी, लँगड़ा, बुुुजदील, षड़यंत्र, बड़े बाबू और साहब, इस भीड़ में, दुःख  दिखे तो कैसे! बाप बेटे और माँ, तुम तो कहते थे! जीवन है ये! 

 सुरेंद्र के पिता को लेकर चार मार्मिक लघुकथाएँ लिखी गई है। 


मेरी चुनिंदा लघुकथाएँ : पवन शर्मा