रविवार, 16 मई 2021

 लघुकथा 


अद्भुत 


       कर्मवीर जी लंबे समय से  ला इलाज  बीमारी से जूझ रहे थे। 

स्वस्थ्य थे तब जनसेवा में समय व्यतीत हो जाता था, पता ही नहीं चलता था। 


       जब भी उन्हें थोड़ा सा आराम मिलता, वह पत्नी से पूछ  ही लेते थे,  "किसी हितेषी का समाचार या  फोन आया ?" 


       पत्नी  का हर बार  "ना" में ही उत्तर होता था। 


      किसी समय कर्मवीर जी के शरीर ने सांसे छोड़ दी। वे देवलोक को  गमन कर गए। 


      अब फोन की रिंग टोन बार बार बजती थी। 

      संवेदना संदेश की भरमार थी। पत्नी फोन काल रिसीव  करते करते निढ़ाल हो जाती थी। 


उदय श्री ताम्हणे 

भोपाल मध्यप्रदेश