गुरुवार, 8 जुलाई 2021

लघुकथा 

आसक्ति 

             "दिल की हर बात अधूरी है अभी। मैं तुम्हारे साथ एक नई जिंदगी शुरु करना चाहता हूँ।"                                          खुद पर इतराते हुए उसने कहा था। कदमों में झुक गया आसमान। 

            " ऐसा नही कि  मुझे कोई खुशी नही । लेकिन किसकी प्रीत भुलाऊ? आपके बच्चे नाबालिग है, उन तक गलत संदेश नहीं जाना चाहिए। उम्र की सीमा से परे, ये कहां आ गये है हम।"  

अच्छा है, सम्भल जाए। 


उदय श्री ताम्हणे  

भोपाल मध्यप्रदेश