शुक्रवार, 6 मार्च 2020

संस्कार : लघुकथा



शंकरपुर, देहली पिन 110092

बबिता कंसल 

लघुकथा  

             नयी नवेली बहू ने  घर के सभी बड़ो के पैर छूकर आशीर्वाद लिया। साथ ही साथ सालो से घर  में काम करने वाली "आई" के पैर भी छूए ।उसने  भी प्यार से बहू को ढेरों आशीर्वाद दे डाले ।
       काम वाली "आई" के पैर छूता देख सांसु मां ने बुरा सा मुहं बनाया ।
        सांसू मां बहू के कमरे मे आकर बोली :

"बहू घर के सभी बड़ो के पैर छूए
 ये देख कर बड़ा अच्छा लगा। पर हमारे घर में काम करनें वाले नौकरो के पैर छूनें का रिवाज़ नही है "।
         "लेकिन मांजी मेरे मां बापू ने कहां है : सभी बड़ों का  सम्मान करना चाहिए "।
         बहू ने सहज भाव से सांसु मां की ओर देखा।