बुधवार, 15 अप्रैल 2020

गद्य क्षणिका , उधार

उधार
गद्य - क्षणिका
*************
उसने बताया था, वह इन दिनो तंगहाली मे जीवन बसर कर रहा है ! बिटिया की स्कूल  फीस जमा करना है। 2000 रुपयो की सख्त जरूरत है ! मन व्यथित हुआ था। मैंने रुपये उसके खाते मे स्थानांतरित कर दिये !
एक दिन वह मुझे रास्ते चलते मिल गया ! आदर सहित उसने मेरा अभिवादन किया ! मैंने भी प्र्त्युत्तर दिया !
आज फिर वह मुझे मिल गया ! नमस्कार का आदान - प्रदान हुआ !
वह आगे बढ़ गया !
मै उससे कुछ कहना चाह रहा था, किन्तु.........
उदय श्री. ताम्हणे
भोपाल मध्यप्रदेश
नमस्ते
गद्य - क्षणिका
*************
मेरे चेहरे पर अनजाने मे ही मुस्कराहट आ गई थी !
एक सम्भ्रात महिला सामने से आ रही थी !
 उसने सोचा मै उसे देख कर मुस्कराया हूँ !
 'नमस्ते' !  मै सुनकर चौक गया !
 स्थिति भाँपकर तुरंत बोला 'नमस्ते' !

उदय श्री. ताम्हणे