रविवार, 24 मई 2020

नन्ही कली

वो पश्चाताप की अग्नि में जला तो,
किन्तु बहुत देर हो चुकी थी तब।


लघुकथा

नन्ही कली

         "सिस्टर क्या वो बयान देने के हालत में है"?
 सिपाही ने अस्पताल की सिस्टर से पूछा ।

         "सर पत्थर से चोट तो बहुत आयी है, हालत बहुत गंभीर है, पर अभी - अभी होश आया है "।

   "तुम्हें ज़रा भी शर्म नहीं आयी, एक चार साल की बच्ची के साथ इतनी घिनौनी हरकत करते हुए?"

 पुलिस अधिकारी ने बयान लेना शुरू किया !

          "सर मैं अपने पर क़ाबू ना कर सका, मैं एक मल्टी नेशनल कम्पनी में नौकरी करता हूँ। सोशल  साईट पर मैं बहुत एक्टिव् था,  बहुत से दोस्त बना लिए। फिर एक ग्रुप भी बना लिया है। जिसमें हम अश्लील विडियो शेयर करने लगे। पहले तो सब ठीक रहा। बाद में मुझे वह  देखकर उत्तेजना होने लगी।" मैं जब भी उस सब को देखता। अपने मनोभाव  पर क़ाबू नहीं कर पाता था। पहले भी मैंने दो बार इसी तरह की कोशिश की पर सफल नहीं हो पाया था ।
इस बार पार्क मे....
मेरे जैसे व्यक्ति की यही
सज़ा है......
और उसकी साँसे डुबती चली गई!

        तभी नब्ज़ टटोलते सिस्टर के मुँह से निकला, "उफ़!  समाज के प्रति हमारा भी कुछ दायित्व है।"

*बबिता  कंसल