गुरुवार, 23 जुलाई 2020

प्रेम लघुकथाकार भारती कुमारी




प्रेम की चाहत किसे नहीं होती ?
पढ़िए ,
भारती कुमारी की
लघुकथा

प्रेम

थोड़ा सा चौंक गई थी वो। उस चौबीस- पच्चीस साल के नवयुवक के हाव-भाव को देखकर।
वह थोड़ा हिचकिचाया पर तमतमाया सा लग रहा था।
"क्यूं बे..! यहां आने से पहले ये अकड़, शरम सब बाहर छोड़कर आया कर.."
वो फटकारते हुए बोली और
अपना पल्लू गिरा दिया। अब वो अचानक से उठा और उसे इतने कस कर पकड़ा कि वो कसमसा उठी।
"ए..! आराम से पहली बार है क्या..?"
वो शरारती लहजे में बोली तो उसने कसावट और बढ़ा दी।

अब वह चीख उठी, चीख सुन उसने उसे छोड़ दिया और खीजते हुए पलंग पर बैठ गया।
"बीवी तो शायद तेरी होगी नहीं अभी। गर्लफ्रेंड से लड़कर आया है?" उसके सवाल पर वो चौंक गया ! चेहरे की खीज और बढ़ी हुई दिख रही थी।
वह पास बैठ गई और हल्के से उसके कंधे पर हाथ रख दिया।
"तीन साल से ज्यादा से दोस्त हैं हम। पर आज तक... ठीक से हाथ भी नहीं लगाने देती। ख्याल रखती है, अपने हाथों का बनाया खिलाती है, पर...कहती है- गलत है ये सब। आजकल इतना तो चलता है और नहीं तो फिर काहे की दोस्ती.. हुं ह.."
वो दांत पीसते हुए बोले जा रहा था। "...और आज जिद की तो छोड़ के चली गई। जैसे वो अकेली है इस दुनिया में.." वो भन्नाते हुए बोला।
"ओह..! वह चली गई और तुमने जाने दिया?"
वो आक्रामक मुद्रा बनाए बैठा रहा।
वो उठी , अपना पल्लू पूरी तरह गिरा उत्तेजक मुद्रा बनाते हुए उसके सामने खड़ी हो गई - "यही चाहिए न..!"

"लो हाजिर है और तीन सालों में जो उसको प्रेम दिए हों, उतना ही मुझे भी देना आज के बाद।"
वो सन्न सा थोड़ी देर उसे देखता रहा फिर झटके से बाहर निकल गया ।
मुस्कुराते हुए वो एक प्रेमी को जाते देखती रही।

भारती कुमारी
गृह संख्या - 505
सेक्टर -4
गुरुग्राम हरियाणा
122001
संपर्क सूत्र -8447118646