भारती कुमारी
लघुकथा
खामोशी
ही इज जस्ट डाइंग फॉर यू..
अचानक से उछाले इस वाक्य से शारदा चौंक गई।
क्या ..! आई मीन, कौन ? किस पर.?
वो अकबक सी चंदन को देख रही थी।
निखिल ?
?"" हाँ . क्या निखिल भैया... फिर रुकते हुए बोली क्या - क्या सोचते हो आप..! "
कब से भैया कहती आई हूं, मेरे भैया
के सबसे अच्छे दोस्त हैं।
शारदा थोड़े गुस्से में बोली।
जय मैं तुम पर शक नहीं कर रहा, अच्छा ये बताओ उन्होंने शादी क्यूं नहीं की अब तक ?
मैं पैंतीस छत्तीस की उम्र तो हो ही
रही होगी..!
ये व्यक्तिगत प्रश्न है, मुझे बस इतना पता है कि घरवालों को ये कह रखा है कि फौजी की जिंदगी और पोस्टिंग का कोई भरोसा नहीं। अंकल-आंटी दुखी हैं उनकी शादी के लिए।
ओह.!!
फ़ालतू सोचते हो आप भी ,हमारी शादी के दस साल हो गए हैं।
...वो तो भैया को दिल्ली में कुछ काम था
तो मिलने आ गए।
कहकर हंसते हुए शारदा जाने लगी तो चंदन ने कलाई पकड़ ली ।
अरे बाबा! ऐसा कुछ होता उनके मन में तो पता चलता न मुझे..
तुम तो हो ही बेपरवाह.. और भैया भी बना रखा है..
चंदन मुस्कुराते हुए बोला।
बट.. रियली, ही इजसी इन लव विद यू..
चंदन की आवाज सुन शारदा के रसोई जाते कदम रुक गए।
और आप ये इतने यकीन से कैसे कह सकते हैं?
अब चंदन गंभीर चेहरे के साथ खामोश था जो शायद
शारदा के प्रश्न काउत्तर था।
भारती कुमारी
