नवोदित लघुकथाकारों से
जहां तक मैं समझता हूं, इस समूह में सभी वरिष्ठ लघुकथाकार है। फिर भी एक प्रयास।
जहां तक मैं समझता हूं, इस समूह में सभी वरिष्ठ लघुकथाकार है। फिर भी एक प्रयास।
लघुकथा लिखते समय हमें तकनीकी पक्ष का ध्यान रखना भी बहुत जरूरी है।
विज्ञान, तकनीक / राष्ट्रीय, अंतर्राष्ट्रीय मुद्दे / पौराणिक, ऐतिहासिक विषय / चिकित्सा शास्त्र / भूगोल / गणितीय गणनाएं / सिनेमा / बच्चे, महिला, पुरुष अन्य वर्ग / राजनीति / प्रशासनिक प्रणाली / धर्म / जाति / न्यायालयीन प्रक्रिया / निर्वाचन प्रक्रिया आचार संहिता आदि विषयों का लघुकथा में परोक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रूप से समावेश होता ही है। ऐसी स्थिति में हमें गहन सोच विचार कर लघुकथा लिखने की आदत बनाने की आवश्यकता है।
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पौराणिक, ऐतिहासिक चरित्र को आधार बनाकर लिखीं गई लघुकथा को मैं स्वीकार्य नहीं कर पाता हूं।
उदय श्री ताम्हणे
भोपाल मध्यप्रदेश
भारत
नवोदित लघुकथाकार से अभिप्राय
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हिंदी में लघुकथा विधा की लोकप्रियता बढ़ रही हैं। पाठक भी लघुकथा लिखने में रुचि रखने लगे हैं।
स्थापित साहित्यकारों के साथ साथ साहित्य से इतर अन्य क्षेत्रों में संलग्न व्यक्ति भी लघुकथाएं लिख रहे हैं।
लघुकथा विधा की रचना प्रक्रिया जटिल मानी जाती रही हैं।
नवोदित लघुकथाकार के लेखन में और स्थापित लघुकथाकार के लेखन में अंतर स्वाभाविक है।
नवोदित लघुकथाकार किसे माना जावे ?
कुछ वरिष्ठ साहित्यकारों ने सन् 2000 या सन् 2010 के बाद लघुकथा लेखन करने वाले लेखकों को नवोदित लघुकथाकार माना है।
अब ऐसे लोग भी लघुकथाएं लिख रहे हैं, जिनका हिंदी साहित्य से पूर्व में कभी कोई सरोकार नहीं रहा है।
मेरा विचार है कि वे ही नवोदित लघुकथा लेखक है।
लघुकथा विधा के विकास हेतु ऐसे लेखकों को प्रोत्साहन मिलना चाहिए।
कुछ योजनाएं चलाई जाना चाहिए।
मैं स्वयं भी इस तरह की योजना तैयार करने हेतु प्रयासरत हूं।
सादर।
उदय श्री ताम्हणे
