बुधवार, 14 अक्टूबर 2020

सच्चा मित्र लघुकथाकार ज्ञानप्रकाश 'पीयूष'

 



लघुकथा 

सच्चा मित्र 

ज्ञानप्रकाश 'पीयूष' 



अरुण और किशोर दोनों एक ही गांव के बचपन के पक्के मित्र थे। संयोग से दोनों का चयन एक साथ सेना में हो गया। गहन प्रशिक्षण के पश्चात उनकी बटालियन को पाकिस्तान बॉर्डर पर भेज दिया गया । अरुण और किशोर दोनों सीमा पर नाइट-ड्यूटी पर तैनात थे, और बड़ी सजगता से ड्यूटी दे रहे थे। तभी उन्हें कुछ पदचाप एवं सरसराहट की सी ध्वनि सुनाई दी। दोनों चौकन्ने हो गए। रात के करीब तीन बजे थे।

शिविर में सभी सैनिक सोए हुए थे। उन्हें फिर सरसराहट की-सी ध्वनि सुनाई दी।

अरुण ने फुस्फुसाते हुए किशोर से पूछा, " कुछ सुनाई पड़ा।"

किशोर ने जवाब दिया: "हाँ, पदचाप की अस्पष्ट - सी ध्वनि रुक-रुक कर सुनाई दे

रही है।"

अरुण ने तुरंत इमरजेंसी-लाइट ऑन कर दी जिसका दूधिया प्रकाश बहुत दूर तक जाता है। दुश्मनों की तरफ से अंधाधुंध गोलीबारी चालू हो गई । उन्होंने भी मोर्चा खोल

दिया। शिविर में सोए हुए बाकी सैनिक भी जग गए और हथियारों से लैस होकर मोर्चे पर डट गए।

दोनों तरफ से गोलियाँ दागी जा रही थीं। तभी एक  गोली अरुण की जांघ में धंस गई। वह नीचे गिर पड़ा। जांघ से खून बह रहा था और वह छटपटा रहा था । इसी बीच

दूसरी गोली  उसके  कान के पास से गुजर गई।

दुश्मनों का ध्यान बंटाने के उद्देश्य से सैनिकों ने दूसरी तरफ से मोर्चा खोल दिया। वे सफल हुए  क्योंकि दुश्मनों की फायरिंग का रुख बदल गया। किशोर ने मौके का फायदा उठाया और दौड़ कर अरुण को कंधे पर उठाकर शिविर के कैज्युअल्टी-रूम में उपचार हेतु ले आया। 

दोनों ने राहत की सांस ली।अरुण और किशोर दोनों एक दूसरे को प्रेम पूर्णदृष्टि से निहारने लगे। 


ज्ञानप्रकाश 'पीयूष' आर.ई.एस.

पूर्व प्रिंसिपल,

1/258 मस्जिदवाली गली

तेलियान मोहल्ला,

सदर बाजार के समीप,सिरसा (हरि.)

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