लघुकथा
तलाश
उदय श्री. ताम्हणे
दीनानाथ जी ३३ वर्ष की शासकीय सेवा पूर्ण कर सेवा निवृत हुए थे !
सुबह की सैर पर आज चलते - चलते उनकी नजर सुन्दर युवती पर पड़ी ! वह युवती बोझिल कदमो से धीरे - धीरे चली जा रही थी ! पास से गुजरे तो देखा उसके चेहरे पर उदासी स्पष्ट झलक रही थी !
उन्होंने उस से कुछ कहना चाहा पर " गुड मॉर्निग " कहकर ही आगे बढ़ गए !
युवती ने भी बस गर्दन झुका कर " अभिवादन " किया !
वापसी में फिर वह युवती मिली ! अबकी दीनानाथ जी से रहा नहीं गया ! उन्होंने पूछ ही लिया !
" आप इतनी उदास क्यों है ? सुबह - सुबह ! "
" जी ! नहीं तो " उसके चेहरे पर मुस्कराहट आई !
उसकी मुस्कराहट ने दीनानाथ जी को बल दिया !
" आप निःसंकोच कहिये ! "
" मुझे नया काम ढूढ़ना है ! अभी जो काम मैं करती हूँ , उस के लिए मुझे सुबह ९ बजे की बस पकड़ना होती है ! वापसी में रात आठ बज जाते है ! घर में माँ अकेली रहती है , वह चल नहीं सकती ! मुझे इतनी पगार भी नहीं की उसकी देखभाल के लिए कोई आया रखु ! "
" ओ हो ! बस इतनी सी बात और इतनी उदासी ! "
" आपको एतराज न हो तो मैं दोपहर में आकर माँ की देख - रेख किया करूँगा ! मैं अभी ३१ तारीख को ही सेवा निवृत हुआ हूँ ! खाली समय के लिए कुछ काम तलाश रहा हूँ ! जब तक मुझे कुछ काम नहीं मिलता और आपकी आया का बंदोबस्त नहीं होता ! तब तक तो हम यह व्यवस्था कर ही सकते है ! "
" लेकिन लोग उंगलियाँ उठाएंगे " उसने आशंका जताई !
" हमारा उद्देश्य नेक है तो , लाख उठे उंगलियाँ " दीनानाथ जी ने दृढ़तापूर्वक कहा !
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वन मुख्यालय
भोपाल मध्यप्रदेश भारत
