रविवार, 18 अक्टूबर 2020

लघुकथा : होम वर्क

  




लघुकथा 

 उदय श्री. ताम्हणे 


      रामलाल जी सेवा निवृत हुए तो घर के कामो में हाथ बांटने लगे , किन्तु परिवार वालो को कुछ न कुछ उनके काम में मीन मेख दिख ही जाता ! मायूस होकर 

 अब रामलाल जी टी वी देखने में समय बिताने लगे ! एक दिन परिवार के किसी सदस्य का जुमला आ ही गया ! टी वी देखने से फुर्सत मिले तब न ? 


  रामलाल जी कुछ लिख रहे थे कि मोन्टी कमरे में आया 


 " दादा जी ! आपने मेरा पेन लिया है , मुझे वापस करो , होम वर्क करना है ! " 


उसके दादा जी ने कहा " हां मोन्टी ! अपना पेन वापस ले जाओ पर मेरा एक काम करो ! " 


" जी " 


" तेरे पापा ने फेसबुक पर मेरा जो अकॉउंट बनाया  है , उसमे यह पोस्ट कर दो कहते हुये, उन्होंने कॉपी का पन्ना और एक कागज का पुर्जा मोन्टी को दिया  जिसपर उनका id और कोड नम्बर लिखा था !


" जी दादा जी "


मोन्टी ने लेपटॉप लिया और तुरंत कॉपी के पन्ने पर उनका लिखा लेख टाइप कर पोस्ट कर दिया ! ठीक है ! अब आप  अपना होमवर्क कर लीजिये ! 


शाम को मोन्टी होम वर्क पूरा कर खेलने जाने लगा तो राम लाल जी ने कहा " मोन्टी जरा मेरा फेसबुक अकॉउंट खोल कर देखना ! "

मोन्टी ने दादा जी कि टाइम लाइन वाल खोली और चहक उठा " दादा जी ! इस पर तो ५५ लाइक और साथ ही ४ बधाई सन्देश भी  है ! "


दादाजी के मुख मंडल पर आत्म संतुष्टि के भाव स्पष्ट परिलक्षित हो रहे थे !