लघुकथा
नहीं सुधरे हालात
"जवानी का ज्वार" ऐसा उठा की उस युवा जोड़े ने प्रेम विवाह कर ही लिया!
नव - वधु युवक के घर आकर रहने लगी!
"बे - रोजगारी" से जुझते हुए अपनी "गृहस्थी की गाड़ी" चलाने का वे, हर संभव" प्रयास" करने लगे!
"मंद आर्थिक स्थिति" के चलते परिवारवाले आये दिन उन्हें प्रताड़ित करने लगे!
रात में "उस जोड़े" के बीच विवाद कुछ ज्यादा गहराया!
सुबह हुई, किन्तु परिवार में उजाला नहीं हुआ!
"वह जोड़ा", "दिव्य ज्योति" में लीन हो गया था!
उदय श्री. ताम्हणे
भोपाल मध्यप्रदेश भारत
