लघुकथा
गुब्बार
श्यामू के खिलौने बच्चों को बहुत प्रिय थे। जैसे ही गलियों में श्यामू की आवाज़ आती बच्चों का जमघट लग जाता था।
श्यामू ने एक बड़ा-सा फुग्गे का पैकेट खोल लिया और उनमें हवा भरने लगा। रंग-बिरंगे ढेरों फुग्गे उसने मुंह से फुंक फुंक कर फुलाएं। कभी कभी तो उसकी सांसें भी उखड़ने लगती। तो कभी कभी फुग्गा ही फुट जाता।
पास ही में बैठे मुन्ना ने उसे बड़ा फुग्गा पकड़ाया और बोला :
"बाबा इसे भी फुलाकर रखो अच्छा लगेगा।"
श्यामू ने दम लगा - लगाकर उसे भी फुला ही लिया।
अब श्यामू अपनी गाड़ी पर फुग्गे सजाने लगा। ताकि उन्हें बेचकर राशन की व्यवस्था हो जाए।
श्यामू की घरवाली ने कहा : "मुन्ने के बाबा देखो तो टीवी पर न्यूज आ रही है! कोरोनावायरस के बढ़ते हुए असर के कारण कर्फ्यू लगाया जा रहा है।"
उदय श्री ताम्हणे
भोपाल मध्यप्रदेश भारत

