रविवार, 8 नवंबर 2020

लघुकथा : असमंजस






लघुकथा  

         उदय श्री ताम्हणे 

असमंजस 


   "ताजा खबर, अख़बार ले लो सेठ जी!" 

   "ठीक है। एक रुपया दूंगा! " 

   "दो रूपये का है!" 

     "मै जानता हूँ, तुझे तो ये कंपनी से मुफ़्त मिलते है!" 

     "तू कामचोरी तो नहीं कर रहा सो ले लेता हूँ, वार्ना लेता भी नहीं!" 

      "एक रुपया लेकर, अख़बार देकर लड़का चलता बना" 

अख़बार लिया है तो पढ़ना भी चाहिए .... न! 

पहला पेज उप चुनाव में सत्ता पक्ष की करारी हार! 

दूसरा पेज असहिष्णुता पर प्रदर्शन! 

तीसरा पेज एटीएम से गिरोह ने रूपये निकाल लिए! 

चौथा पेज महिला का मंगलसूत्र ले कर भागे लुटेरे! 

सेठ का मन कसैला हो गया,  अख़बार को मोड़कर वह बुदबुदाया क्यों ले लिया मैने यह अखबार!