मूल नाम :-
सुषमा तिवारी
माता का नाम :-
माता का नाम :-
श्रीमती श्रीकांती मिश्रा
पिता का नाम :-
पिता का नाम :-
श्री राधेश्याम मिश्रा
जन्म तिथि :-
जन्म तिथि :-
16/04/1985
जन्म स्थान :-
जन्म स्थान :-
मुंबई
शैक्षणिक योग्यता :-
शैक्षणिक योग्यता :-
बी. ए ऑनर्स (मनोविज्ञान), एमबीए ( एच आर)
प्रकाशित पुस्तकों का नाम :-
प्रकाशित पुस्तकों का नाम :-
मीरा की कहानियाँ (इ बुक)
(सिर्फ साझा संकलन)— हे पवन, रूह से ( लघुकथा संग्रह), कुटुंब - 2 (बोलता साहित्य संस्मरण संकलन), लघुकथा मंजूषा - 5, रत्नावली
whispers of midnight, troupes of wishes, shhh.., colors of dream, hunched अल्फाज, spellbound fables
जिन पत्रिकाओं में रचना प्रकाशित हुई है उसका नाम :-
(सिर्फ साझा संकलन)— हे पवन, रूह से ( लघुकथा संग्रह), कुटुंब - 2 (बोलता साहित्य संस्मरण संकलन), लघुकथा मंजूषा - 5, रत्नावली
whispers of midnight, troupes of wishes, shhh.., colors of dream, hunched अल्फाज, spellbound fables
जिन पत्रिकाओं में रचना प्रकाशित हुई है उसका नाम :-
भावांकुर, सृजनोन्मुख, नवीन साहित्य, पलाश, साहित्य तक, तर्क संग्रह
संपादन :-
संपादन :-
नहीं
सम्मान व वर्ष :-
सम्मान व वर्ष :-
स्टोरी मिरर नॉन स्टॉप लेखन नवम्बर 2019, पेपरविफ हिन्दी सम्मान 2019
सम्पर्क :-
सम्पर्क :-
305 वसंत पार्क daffodils A wing, khadakpada, Kalyan West, Maharashtra 421301
सम्प्रति :-
सम्प्रति :-
गृहणी
सम्पर्क सूत्र :- 9322722932
ईमेल :- sushma_s_tiwari@hotmail.com
सम्पर्क सूत्र :- 9322722932
ईमेल :- sushma_s_tiwari@hotmail.com
लघुकथा
संस्कार कर्म
"अरे भाई साहब! बड़ी व्यस्तता में भागे जा रहे हैं....
आज चौपाल पर नहीं बैठेंगे?"
" नहीं, आज नहीं हो पाएगा रुकना.....
" नहीं, आज नहीं हो पाएगा रुकना.....
कन्या पूजन का सामान लाना है"
"मतलब आप भी लगे हुए है? समझ नहीं आता क्या मिलता है! लोगों को इस दिखावे के कर्म से? जहां देखो कन्याओं पर अत्याचार के कांड सुनाई देती है और आप जैसे लोग अब भी कर्मकांड कर रहे हैं!"
"कर्मकांड नहीं करने से कांड बंद हो जाएंगे? यूँ चौपाल पर बैठ कर 'कड़ी आलोचना' करने से बंद हो जाएंगे?''
"तो आप बताइए कैसे बंद होंगे?"
"कड़े कदम उठाने से!!....
"मतलब आप भी लगे हुए है? समझ नहीं आता क्या मिलता है! लोगों को इस दिखावे के कर्म से? जहां देखो कन्याओं पर अत्याचार के कांड सुनाई देती है और आप जैसे लोग अब भी कर्मकांड कर रहे हैं!"
"कर्मकांड नहीं करने से कांड बंद हो जाएंगे? यूँ चौपाल पर बैठ कर 'कड़ी आलोचना' करने से बंद हो जाएंगे?''
"तो आप बताइए कैसे बंद होंगे?"
"कड़े कदम उठाने से!!....
देखिए! आपके जवाब का तो मुझे नहीं पता परन्तु मैं इतना जानता हूं कि हर त्यौहार पर आप लोग नैतिकता के प्रश्न खड़े कर देते हैं! त्यौहार है भाई, सुधार कार्यक्रम नहीं। जहां तक मेरा प्रश्न है तो मैं अपने बेटे को हमेशा ही हर व्यक्ति खासकर स्त्रियों को सम्मान देना और अपने विचारो पर नियंत्रण रखने की सीख देता हूं....
सुषमा तिवारी
साथ ही साथ अपनी बेटी को दुर्गा जैसे बनने का प्रशिक्षण भी देता हूं। ये कांड त्यौहारों मे नहीं अपितु संस्कारों में सुधार लाकर रोके जा सकते है।"
सुषमा तिवारी
