लाजपत राय गर्ग
आशीर्वाद
संस्था द्वारा संचालित स्कूल का वार्षिकोत्सव। सरस्वती वन्दना के
पश्चात् एक अल्हड़ किशोरी ने मंचासीन संस्था-प्रमुख स्वामी जी के सम्मान में
स्वागत गीत प्रस्तुत किया। बालिका जितनी स्वयं सुन्दर थी, उतना ही मधुर था
उसका कंठ। गीत गायन के दौरान स्वामी जी बहुत ही प्रभावित लग रहे थे, क्योंकि
वे निरन्तर आहिस्ता-आहिस्ता सिर हिलाते रहे थे।
कार्यक्रम की समाप्ति पर स्वामी जी ने अपने अंतरंग सेवक को संकेत
से अपने पास बुलाया और धीमे स्वर में उसे आदेश दिया - 'जिस बालिका ने स्वागत
गीत गाया था, हम उसके मधुर कंठ से अति प्रसन्न हैं। तुम उस बालिका को हमारे
कक्ष में भेजो। हम उस बालिका को आशीर्वाद देना चाहते हैं।'
'जो आज्ञा महाराज', कहते हुए सेवक रहस्यमयी मुस्कान परिवेश में
बिखेरते हुए तत्परता से वहां से चला गया।
