शनिवार, 13 फ़रवरी 2021

जनानी जात लघुकथाकार कनक हरलालका

 


            कनक हरलालका

जन्मतिथि : 15 . अगस्त
शिक्षा : स्नातकोत्तर हिन्दी
पता :  Harlalka Building
         H . N . Road
          Dhubri 
          Assam   pin. 783301
       Mobile : 9706265667   


लघुकथा 

जनानी जात

 
       सरकारी अस्पताल के जनरल वार्ड के बेड नम्बर १७ पर लेटी साबितरी ने रामू से कहा, " सुनो जी, तुम जरा देर रुक कर जाना। सिस्टर जी चक्कर लगा कर जरा चली जावें।" 

कल ही उसने लड़की को जन्म दिया था। निम्न, मध्यम वर्गीय प्रसूताओं के स्वास्थ्य लाभ की योजना के अन्तर्गत सरकार की तरफ से उन्हें पुष्टि कर विशेष भोजन देने की व्यवस्था थी। 
'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' योजना के तहत बेटी जन्म पर शिक्षा के लिए दी जाने वाली विशेष राशि तो सीधे बचत खाते में जमा कर दी जाती थी। प्रसूता को खाने के साथ दो गिलास दूध ,सेव और हॉरलिक्स दिया जाता था।
सिस्टर के जाने के बाद सावित्री ने कम्बल के अन्दर से दो सेव निकाल कर रामू को दिए। "तुम अऊर बचवा घर जाकर खा लेना , और ये दूध भी ले जाओ,रात में खाने की जगह बचवा को पिला देना। दो ही दिन मिलेगा। कल या परसों तो छुट्टी ही मिल जाएगी।"
रामू ने कुछ असमंजस से कहा" फिर तुम? और छुटकी के लिए दूध कैसे उतरेगा?  और तुम्हारी सेहत .....?"
 "अरे तुम चिंता नाहीं करो। भगवान जनानी जात को बहुत कुछ सहने की ताकत देकर भेजता है। जब वह दूसरे जन को जनम देने का दरद सह जावे है। तो फिर बहुत कुछ सह जावे है। और बच्चे को भी वह धरती पर भेजने के साथ माँ को छाती में दूध देकर भेजता है। पेट भरने को । छुटकी को कछु नहीं होगा।  भगवान ने उसे भी जनानी जात देकर ही तो भेजा है धरती पर।"

कनक हरलालका