ईश्वर सब देखता है
वह कुशल कर्मचारी है ! उसकी दो बेटियाँ और एक छोटा पुत्र है! उसे चिंता है, तो बस अपनी बेटी के विवाह की! एक बेटी का विवाह हो गया है। सम्भ्रात परिवार मे! अब दूसरी का तय होना है! घर-परिवार मित्रो के उलाहने पा कर मन भटकने लगता है। भ्रष्ट आचरण की ओर! धूम-धाम से विवाह करू! कोने मे बैठी इच्छाये कुलाचे भरने लगती! अगले ही पल याद आते वे दिन जब ऐसे ही कभी वह बड़ी बेटी के लिए सोच मे डूबा था, की रिश्ता स्वयं चल कर आया, वर पक्ष ने सोना- चाँदी न मांगा खुशी- खुशी बेटी को ब्याह कर ले गए!
उदय श्री
