अर्विना
हाउस नं 4 ज्योति किरन सोसायटी ग्रेटर नोएडा
पिन कोड 201310
मोबाइल 9958312905
आत्मविश्वास
भुवन तुम्हारे ......भाई भाभी तो इस दुनियां से चले गए सागर की जिम्मेदारी हमें सौप गए । घरों में झाड़ू बर्तन करके घर चला रही हूं । सागर इस मंहगाई में पढ़ने की जिद लेकर बैठा है इसका पेट पालू या इसे पढ़ाऊं ।
इतनी हैसियत नहीं है कि इसके लिए महंगा वाल मोबाइल फोन खरीद कर दे सकूं , इसे सरकारी स्कूल में डाल था की चलो काम लायक पढ़ लेगा । इधर तुम्हारे इलाज की चिंता सताती रहती है ।
" ये किसे पता था ? "
इस बरस महामारी में स्कूल ही बंद हो जायेंगे सारी पढ़ाई मोबाईल फोन पर होगी ? एक मोबाइल तो बड़ी मुश्किल से मैडम का एक्स्ट्रा काम करने के एवज में मिल गया उसे दीपू के पढ़ने के लिए दे दिया.......... अब ये भी दीपू की होड़ में मोबाइल की जिद पर अड़ा हैं ।
"सहमा हुआ सा सागर कमरे के कौने में उकडू बैठा था ।"
"आँसूओं का सैलाब थम गया था।"
सागर समझ नहीं पा रहा था वाणी चाची उससे इतनी नफ़रत क्यों करती है ?
"मैं तो बस पढ़ना चाहता हूंँ ।"
चाचा की बीमारी ने उन्हें बेबस बना दिया है मुझे देख कर बस चुपचाप सर झुका लिया । शायद वे भी अपनी बीमारी से मजबूर हैं मुझे भी कुछ करना होगा ।
सागर ने मन ही मन निर्णय लिया झाडू बनाने के कारखाने के मालिक से अपने काम के लिए जो बात थी उसे अब हां कहने का वक्त आ गया है।
शाम की शिफ्ट में काम करके अपने पढ़ने के लिए खुद मेहनत करेगा यह सोच कर ही सागर के चेहरे पर आत्मविश्वास की चमक से चेहरा दमक उठा।
