Uday shri tamhaney
इंदुमति और श्रीपाद श्रीनिवास की स्मृति को समर्पित साहित्यिक अव्यवसायिक ब्लाॅग पत्रिका
गुरुवार, 15 अप्रैल 2021
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लघुकथा माटी का रस “यह क्या जंगल उगा रखा है तुमने आंगन में?” “जंगल?” “हां और नहीं तो क्या, एक एक गमले में चार -चार, छः ...
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गिलहरी और मूँगफली उदय श्री. ताम्हणे 'श्रीमान जी! अभी मुझे आधा घंटा लगेगा आपके पास पहुँचने में! तब तक इंतजार कीजिये !' उधर से आव...
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मशीनों की जन्नत "क्या!... क्या तुम पागल हो चुके हो रंजन? या.... या सही शब्द तुम्हें पता नही है?" "नही प्रोफेसर मैं पूरे ह...

