मंगलवार, 15 मार्च 2022

मेरा जीवन (1)

लघुकथा 

हिम्मत 

    विगत वर्ष होली मिलन के शुभ अवसर पर मैं कोविड अस्पताल में दिन गिन रहा था। कब इस 'जेल' से 'रिहाई' होगी। सख्त लॉक डाउन जो था। बेटा प्रतिदिन अस्पताल में टिफिन पहुंचाया करता था। मैं राहत महसूस किया करता था। 

        तब बेटे ने बड़े ड्राय फ्रुट के डिब्बे के साथ संदेश भेजा कि "बाबा अब होली है, तीन दिन मैं टिफिन नहीं भेजूंगा।" मैंने कुछ कहना चाहा था लेकिन। 

     अब हमारी 'हिम्मत' तो देखो हम कुछ नहीं बोला। 


उदय श्री ताम्हणे 

भोपाल मध्यप्रदेश 

भारत