गुरुवार, 12 मार्च 2020

मेरा विचार


भाई साहब! सीखने की प्रक्रिया तो निरंतर चलती ही रहती है। वक्त बेवक्त घटना घटित होती है, उनसे ही तजुर्बा हासिल होता है। सबक मिलता है।  सीखने की बात है तो लिखने से सीखेंगे और ना लिखने से भी कुछ ना कुछ तो सीखेंगे ही। अपनी लेखनी पर भरोसा है तो जरूर लिखना चाहिए।