शनिवार, 28 मार्च 2020

लघुकथा बदली



 लघुकथा 

 बदली 

 उदय श्री. ताम्हणे 

मैकू ने सुल्तानपुर से राजधानी में बदली करवा ली थी!

यहाँ आते ही अपना पूरा नाम राजेन्द्र प्रसाद "मैकू" की नेम प्लेट बनवाकर मकान के दरवाजे पर लगा दी थी!

मोहल्ले में उसकी पहचान 
"मैकू साहब" से होने लगी थी!

रात आठ बजे कार्यालय से आते ही मैकू ने मोबाइल किया 
 "एक खुशखबरी है - कम्मो! पिछले कुछ दिनों में रुपये मिल गए थे! सो अपने भू - खंड की रजिस्ट्री करवाली है ! जानती हो पुरे ५००० ऊपर से लग गए, और सुनो अपने देवर जी को यहाँ भेज दो! कार्यालय में कूलर में पानी भरने के लिए रखवा देंगे! 
हां! कुछ दिन रुको फिर मुन्ना के साथ तुम्हे भी यह लिवा लाऊंगा!

अब तुम निश्चित हो कर सो जाओ। यहाँ तो समय ही नहीं मिलता!

जीवन में परिवर्तन आवश्यक है किन्तु ? 



उदय श्री ताम्हणे भोपाल मध्यप्रदेश