सोमवार, 9 मार्च 2020

गद्य क्षणिका : मान भी जाओ



गद्य क्षणिका
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मान भी जाओ
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           "ऊ हूं ! आज भी आप कार्यालय से लौटते ही सोशल मीडिया खोल कर  बैठ गए। आज तो होली का त्यौहार है।"
    पत्नी ने उलाहना दिया।
         "जानेमन दिन भर में पचास  साठ ही तो मेसेज आए हैं। एक  नज़र  देख  ही लेता हूं, शायद कोई  काम का मेसेज निकल आए ।" मैंने कहा।
              " इतने मेसेज तो मेरे मोबाइल में भी आए हैं।" पत्नी ने कहा।
दोनों के मोबाइल से निकल रही रोशनी मिलकर अलहदा रंग बिखेरने लगी।

उदय श्री ताम्हणे