शनिवार, 28 मार्च 2020

कपिल शास्त्री

लघुकथा
बरक
कथाकार कपिल शास्त्री
भोपाल मध्यप्रदेश


संकलन :  सफ़र संवेदनाओ का,
 वनिका पब्लिकेशन

             आंचलिक भाषा के संवाद युक्त लघुकथा में दहेज़ प्रथा पर करारा प्रहार है । अपनी बेटी को विवाह पश्चात भी सुखी रखने की पिता की चाह में मिठाई वाला पिता मिठाई पर बरक लगाते लगाते बेटी को ज़ेवरों से सजा देता है । फिर हकीकत से रूबरू होने पर आत्मग्लानि से भर जाता है ।
कपिल शास्त्री की यह बरक लघुकथा प्रतिनिधि लघुकथा में सम्मिलित की जाने योग्य हैं ।

उदय श्री . ताम्हणे