रविवार, 21 जून 2020

जिंदादिल लघुकथाकार अर्विना

अच्छे उद्देश्य से दिया गया बढ़ावा  कितना लाभदायक हो सकता है ? अर्विना  की  लघुकथा पढ़िए

जिंदादिल

                   लता  "सर्दी की गुनगुनी धूप मे बैठने का आनंद ही कुछ अलग है।"

  रोहित    "विटामिन डी  जो मिल जाता है।"

        इस  बुढ़ापे में चलने फिरने की एनर्जी मिल जाती है,  वर्ना ये घुटने तो अब साथ नहीं देते ।

 लता   "वो इवेंट आज मुझे याद है, जब चार सौ मीटर में मैंने और सौ मीटर में तुमने गोल्ड मेडल जीता था।"

  रोहित  "कालेज की तुम उड़ान परी थी ।"

    लता  "तुम सबकी जान थे ।"

    "वो भी क्या दिन  थे ?" सुबह-सुबह उठना दौड़ लगाना तुम्हारे संग में, अब तो सब सपने जैसा लगता है।

   रोहित  "बीता हुआ समय वापस तो नहीं आ सकता लेकिन ‌जीने का उत्साह दे जाता है!"

 "रोहित ! वो गाना याद है,  जो हम मिलकर गया करते थे।"

हम बने तुम बने ..... .एक दूजे के लिए

" हां ..वाह मजा आ गया तुम तो अभी भी अच्छा गा लेती हो।"

तुम्हारे "इंक्रेजमेन्ट" का ही नतीजा है ।

" मैं तो गाना क्या हँसना भी भूल गई थी ।"

" रोहित ! तुम  जैसे जिंदादिल इंसान की वजह से ही में  कैंसर से लड़ सकी हूँ ।"

अर्विना

 ग्रेटर नोएडा