लघुकथा
उदय श्री. ताम्हणे
छोटी कमीज
कार्यालय से लौटते हुए ही अक्सर बाबूजी बाजार में रूककर घरेलु उपयोग की वस्तुए ले लेते थे ! दीपावली पर्व शुरू होने में दो दिन शेष थे ! पगार मिल गई थी सो बाबूजी ' बाबा सूट गारमेंट ' में चले गए ! बच्चो के साथ खरीददारी करो तो बजट की सीमा लांघने का डर बना रहता है !
' हरे रंग में लेटेस्ट डिजाइन की कमीज बताइये '
जी सर ! आप के बेटे के लिए ?'
'जी हां !'
'ये लीजिये बढ़िया क्वालिटी में लेटेस्ट डिजाइन में '
' वाह ! अच्छा है ! कितने का है ? '
' जी २५० रूपये !'
बाबूजी ने कमीज खरीद लिया ! घर लौटते ही हमेशा की तरह बेटे ने बेग खोला !
देखो ! देखो अम्मा , बाबूजी मेरे लिए कमीज लाये है !' मेरी पसंद का रंग डिजाइन है !
बेटा कमीज खोलकर पहनने लगा ! अरे यह क्या यह तो बहुत छोटी है ! 'बाबूजी यह तो बच्चो के साइज की है , इसे बदलवा दीजिये ! मैं अब बड़ा हो गया हूँ !'
बाबूजी को ध्यान में आया वे 'बाबा सूट गारमेंट ' में चले गए थे !
भोपाल मध्यप्रदेश
