गीतकार इंदीवर जी ने बहुत ही दार्शनिक गीत लिखे हैं।
एक समय था जब दूरदर्शन शनिवार को रात में फिल्म का प्रसारण करता था।
जिस दिन "सफर" फिल्म का प्रसारण किया गया उसके अगले ही दिन सुबह ही मेरे पिता श्री का स्वर्गवास हुआ था।
मुझे फिल्म का यह नाविक गीत बार बार याद आता रहा ।
"नदिया चले चले धारा तुझको चलना होगा, तुझको चलना होगा जीवन कभी भी ठहरता नहीं है"।
इससे और संबल मिला था।
एक समय था जब दूरदर्शन शनिवार को रात में फिल्म का प्रसारण करता था।
जिस दिन "सफर" फिल्म का प्रसारण किया गया उसके अगले ही दिन सुबह ही मेरे पिता श्री का स्वर्गवास हुआ था।
मुझे फिल्म का यह नाविक गीत बार बार याद आता रहा ।
"नदिया चले चले धारा तुझको चलना होगा, तुझको चलना होगा जीवन कभी भी ठहरता नहीं है"।
इससे और संबल मिला था।
