रविवार, 9 अगस्त 2020

लघुकथा : लघुकथा और लघु व्यथा

लघुकथा और लघु व्यथा 


किसी ने कहा कि लघुकथा का कथानक दिमाग की हांडी में पकने के लिए छोड़ दो।
जब दिमाग में कथानक अच्छी तरह से घुट जाएं, फिर लघुकथा लिखों।

अपन ने  ऐसा ही किया चार महीने कथानक को घोंटते रहें, उबाल आया। फिर एक दिन क्या देखा की उसी कथानक पर अनेक लघुकथाएं नेटवर्क पर घुम रहीं हैं।

लिख्खड  बाज़ी मारी गये।

हम सोचते ही रह गए और बने  "लघुकथा ठन ठन गोपाल"।

उदय श्री ताम्हणे 
भोपाल मध्यप्रदेश भारत 
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