शनिवार, 1 अगस्त 2020

छवि, विश्वास लघुकथाकार रंजना फतेपुरकर





            अपने सिद्धांतों   पर कायम रहना चाहिए। इस बात को पुष्ट करती हुई रंजना फतेपुरकर की लघुकथा पढ़िए :-

छवि

        यादों के झरोखे में झांक कर मैं अपने दोस्तों को याद कर रही थी।
 कभी उनकी मधुर स्मृतियां होठों पर मुस्कराहट लाती तो कभी उनकी कमी आंखों में नमी।

        तभी मेरी नज़र सामने दर्पण पर पड़ी। मेरी हर खुशी दर्पण में मुस्कराहट बन नज़र आती थी और मेरा हर दुःख दर्पण में आंसू बन नज़र आता था।

अचानक दर्पण ने पूछा-
        "क्या अपने दोस्तों की सूची में मुझे शामिल नहीं करोगी? मैं भी तो तुम्हारे सुख दुःख का प्रतिबिम्ब हूँ।"

         मैंने कुछ सोचकर कहा- "दर्पण, यह सच है कि तुम मेरे हर सुख दुःख में शामिल रहते हो, लेकिन तुम न तो कभी कुछ याद दिलाकर मेरे चेहरे पर मुस्कराहट लाते हो और न कभी आंखों में नमी लाते हो। तुम तो बस मेरी ही छवि मुझे दिखाते हो।"

     दर्पण ने कहा-

       "यह सच है कि मैं तुम्हारी ही छवि तुमको दिखता हूँ। पर यह भी उतना ही सच है कि जब तुम हंसती हो मैं भी हंसता हूँ, जब तुम उदास होती हो मेरी आँखें नम हो जाती हैं। पर अगर तुम मुझ पर प्रहार करोगी तो मैं प्रत्युत्तर में तुम पर प्रहार नहीं करूंगा बल्कि दुःख से चूर चूर होकर बिखर जाऊंगा।"

        अब दोस्तों की सूची में दर्पण का नाम सबसे ऊपर था।

 रंजना फतेपुरकर 


लघुकथा
   विश्वास
      गांव में वर्षा नहीं हो रही थी।सारे खेत सूखे पड़े थे।आखिर सबने सोचा, ईश्वर की प्रार्थना की जाए ताकि ईश्वर प्रसन्न होकर पानी बरसा दें।सारे गांव ने मिलकर प्रार्थना शुरू की।कितना समय व्यतीत हो गया पर वर्षा न हुई।आखिर त्रस्त हो गांववासियों ने ईश्वर से पूछा- "हे ईश्वर,हमें आप पूरा विश्वास था कि आप हमारी प्रार्थना जरूर सुनेंगे।" तभी अकाशवाणी हुई "गांववासियों,जब तक आप सब ईश्वर में पूर्ण विश्वास नहीं रखेंगे वर्षा नहीं होगी।यहां सिर्फ एक बालक ही ऐसा है जिसने ईश्वर के प्रति पूर्ण विश्वास को प्रकट किया है।" सभी गांव वाले हैरानी से वहां उपस्थित एक बालक को देखने लगे,लेकिन उन्हें समझ में नहीं आया बालक ने ऐसा क्या किया है जिससे ईश्वर को स्वयं के प्रति विश्वास महसूस हो रहा है। तभी फिरसे अकाशवाणी हुई- जरा ध्यान से बालक को देखो।वह प्रार्थना में छाता साथ लेकर आया है।यही ईश्वर के प्रति पूर्ण विश्वास को दर्शा रहा है।" अब गांववासी सम्पूर्ण विश्वास के साथ प्रार्थना में लीन हो गए। अगले कुछ ही पलों में सारा गांव वर्षा में भीग रहा था।
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 रंजना फतेपुरकर
इंदौर मध्यप्रदेश