अबला बलहीन स्त्री नहीं ,
अतुलित बल धारण करने वाली स्त्री होगी। अपने इस विचार को दिव्या राकेश शर्मा ने लघुकथा में पिरोया है। पढ़िए :-
लघुकथा
अतुलित बल धामा
"दीदी! हिंसा का अर्थ क्या होता है?"मधु की छोटी बहन आर्या ने प्रश्न किया।
"किसी को मारना या चोट पहुंचाना हिंसा होती है।"मधु ने जवाब दिया।
"और अहिंसा?"आर्या ने दोबारा पुछा।
"किसी को न सताना और न ही किसी का रक्त बहाना।"
"तुल्य का अर्थ?"
"जिसकी तुलना की जा सके।"मधु ने कहा।
"और अतुलनीय का?"आर्या ने कहा।
"जिसकी तुलना न की जा सके।जो सबसे अलग हो लेकिन एक बात बताओ!दसवीं कक्षा में पढ़ती हो और मामूली शब्दों के अर्थ नहीं जानती?ध्यान कहाँ रहता है तुम्हारा?"मधु ने झुंझलाते हुए कहा।
"अच्छा, बस एक और शब्द का अर्थ बता दो प्यारी दीदी कि अबला का क्या अर्थ होता है?"आर्या ने कहा।
"बलहीन स्त्री।"मधु ने धीरे से कहा।उसके चेहरे पर एक अजीब सी पीड़ा उभर आई।
"अबला का अर्थ बलहीन कैसे हो सकता है दीदी?जब अ जोड़ने से मर अमर हो जाता है तो बल के साथ अ जोड़ने वह बलहीन कैसे हो सकता है?"आर्या ने कहा।
"मतलब… क्या कह रही हो आर्या?"मधु ने परेशान हो कर कहा।
"यही कि अबला का अर्थ बलहीन स्त्री नहीं बल्कि अतुलित बल धारण करने वाली होता है।अदम्य साहस वाली होता है।"आर्या ने रोष से कहा।
"यह अर्थ ही मान्य है आर्या...वैसे भी औरत होती तो कमजोर ही है।"हथेलियों को आपस में उलझाते हुए मधु ने कहा।
"मैं नहीं मानती।क्या माँ काली माँ दुर्गा स्त्री नहीं?"
"तुम ठीक कह रही हो शायद..।"मधु ने कुछ सोचकर कहा।
"तो फिर आप उस लफंगे से डरकर कैसे कॉलेज जाना बंद कर सकती हो?याद रखिए दीदी स्त्री बलहीन नहीं बल्कि बलशाली है और इतनी बलशाली की सृष्टि का सृजन के साथ विनाश भी कर सकती है।"
"और इतनी बुद्धि धारणी की सबको सही राह भी दिखा सकती है।"इतना कहकर मधु ने आर्या को गले से लगा लिया।कमरें में खिलखिलाहट गूंजने लगी।लेकिन इस खिलखिलाहट में आत्मविश्वास था।
दिव्या राकेश शर्मा
पता-
दिव्या शर्मा
मकान नं-4,गली नंबर-9A,अशोक विहार फेस-2
गुरुग्राम हरियाणा।
पिनकोड-122001
सम्पर्क सूत्र-7303113924
ईमेल आईडी-sharmadivya9717064358@gmail.com
