*मनोरमा पंत*
*9229113195*
प्रमोशन
"जा बे, उस भैंस चोर को जेल से लाकर थाने में हाजिर कर।"
"क्यों साहब! "
"ज्यादा सवाल जवाब मत कर, घंटे भर में हाजिर कर ।"कुटिल मुस्कान बिखेरते थानेदार बोला।
हाजिर होते ही भैंसचोर थानेदार के चरणों में लिपट गया- "साहब! आप देवता आदमी हैं, जो मुझे जल्दी छोड़ दिया।"
अरे बेवकूफ! तुझे इसलिए छोड़ा है कि तू नेताजी की भैंस चोरी करे। सुना है बड़ी सफाई है तेरे काम में। आँखों से काजल भी चुरा ले तो सामने वाले को मालूम भी न पड़े।"
"पर मुझे किसी ने पकड़ लिया तो ? आपको भैंस चाहिऐ तो किसी गरीब गुरबे की भैंस आपके आँगन में पहुँचा दूँगा।"
"है तो निरा भौंद ही ! फ्री में रोज खालिस दूध आ जाता है तो, भैंस की झंझट कौन पाले। जा, नेताजी की भैंस चुराकर कहीं छुपा दें।वैसे भी तो तुझे जेल में ही आना है ।"
शाम होते होते आग के समान शहर में खबर फैल गई कि नेताजी की भैंस दिन दहाड़े चोरी हो गई परंतु कर्मठ थानेदार ने रात होने से पहले ही भैंस चोर को पकड़, भैंस बरामद कर ली। नेताजी की सिफारिश पर थानेदार जी का प्रमोशन हो गया। भैंस चोर जेल में वापिस पहुँच गया।
मनोरमा पंत जी की एक
व्यंग्यात्मक लघुकथा
प्रत्याशी
नामांकन का दिन पास आता जा रहा था, पर अभी तक कुकर बस्ती में यही तय नही था कि चुनाव कौन लेगा ।बहुत से युवा चुनाव लड़ना चाहते थे, एक नाम तय नहीं हो पा रहा था। तभी बस्ती के वयोवृद्ध कूकर श्रीमणि की नजर नेता जी के अलसेशियन कूकर पर पड़ी, एकदम तदुरूस्त, चमकीले बालों वाला, मस्तानी चाल से अपने नौकर के साथ टहलते दिखा। बस, उसके दिमाग में कुछ कौंधा और उसने चिल्ला कर कुत्तो को पुकारा
' इधर आओ,भाई सब ।प्रत्याशी मिल गया। सबने बड़ी उत्सुकता से पूछा - कौन ? श्रीमणि ने नेता जी के कुत्ते की ओर इशारा किया।सबने हैरान परेशान होकर कहा - 'अरे ये बँगले के अंदर रहने वाला हमारा नेता कैसे बन सकता है? श्रीमणि ने कहा -'रोटी के एक टुकड़े के लिये दिन भर भटकते तुम लोगों की क्या औकात है, जो तुम लोग चुनाव लड़ोगे।
बस फैसला हो गया। रही बंद बँगले से चुनाव लड़ने की बात, यह लोकतान्त्रिक देश है। यहाँ मनुष्य जाति के महाबली जेलों में रहते हुऐ भी चुनाव लड़ते हैं और जीत भी जाते हैं। जीतने के लिये धन और बल दोनों चाहिये ।
समझे?
भोपाल मध्यप्रदेश
बस फैसला हो गया। रही बंद बँगले से चुनाव लड़ने की बात, यह लोकतान्त्रिक देश है। यहाँ मनुष्य जाति के महाबली जेलों में रहते हुऐ भी चुनाव लड़ते हैं और जीत भी जाते हैं। जीतने के लिये धन और बल दोनों चाहिये ।
समझे?
भोपाल मध्यप्रदेश
मनोरमा पंत
सेवानिवृत शिक्षिका केन्द्रीय विद्यालय
सम्प्रति- सदस्या विश्व मैत्री मंच
लेखिका संघ भोपाल
साहित्यिक परिचय :
जागरण, कर्मवीर एवं अक्षरा में कविताएं तथा लघुकथाएं प्रकाशित
आन लाइन प्रकाशन :
हिंदी रक्षक मंच इन्दौर पर लेख कविताऐं लघुकथा
आनलाइन रचना पाठ :
लेखिका संघ भोपाल
माधव साहित्य संगम
बाड़मेर राजस्थान
निवास : भोपाल मध्यप्रदेश
दूरभाष 0755 4274447
मोबाइल 9229113195
पिन कोड 462016
