लघुकथा
तू , मैं और वो
गले में रुमाल लपेटकर, टी शर्ट की कालर ठीक कर, वह फल के ठेले वाले से बोला :
" तू यहां क्यों आकर खड़ा हो गया ? यहां तुझे ग्राहकों का टोटा रहता हैं।"
" मै क्या करता दादा वहां पुलिस जो आ गई थी।"
"अरे! तेरी ग्राहकी नहीं होगी तो मेरा कमिशन कौन देगा! तेरा बाप?"
चल जा वहीं खड़ा हो जा। अपनी जगह पर। हम निपट लेंगे उनसे।"
अब फल वाला अपना ठेला धकाकर बस स्टॉप के सामने जा खड़ा हो गया था।
उदय श्री ताम्हणे
भोपाल मध्यप्रदेश
भारत
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