लघुकथा
तरकीब
'राठी जी! आपने तो कहा था, बस्ती मे लगभग तीन सौ ही लोग है । पर यहां पर तो बहुत भीड़ है ।
ये तो हजार लोग से कम नही हैं। राशन बांटनें वाले पैकट तो पांच सौ ही है ।'
'देखतें है गुप्ता ज़ी! तरकीब निकालता हूं।'
राठी जी ने गुप्ता जी से कहां।
"ठीक है, तो आप इनको कतार मे खड़ा कर पैकट बाटनां शुरू करिये "।
गुप्ता जी ने राठी जी से कहा।
सभी मजदूर दूरी का पालन करते हुए आये और राशन ले ले , देखिये भीड़ नही लगानी है "।
कतार मे लगे लोग दूरी का पालन करतें हुए आगे बढ कर राशन के पैकट लेने लगे ।
"अरे तुम ! तुम तो वही होना जिसको कल ही पूरे महीनें का राशन दिया था । आज फिर से....... कतार मे लगे हो ......"।
राठी जी एक व्यक्ति की ओर इशारा करते हुए जोर से चिल्लाकर बोले।
सुन कर वह व्यक्ति सिर झुका कर जल्दी से आगे बढ गया ।
अब भीड़ छटनें लगी थी ,कतार मे लगे लोग आधे ही रह गये थे।
बबिता कंसल
नाम बबीता कंसल
माता ,प्रतिभा रानी
पिता -धर्मेंद्र मोहन गुप्ता
जन्म स्थान - जानसठ (मुजफ्फर नगर )
निवास स्थान -दिल्ली
शिक्षा - एस .डी .डिग्री .मु०नगर
M.A -इक्नोमिकस,इतिहास
प्रकाशित रचनाए -
भोपाल लोकजंग , साझा काव्य संग्रह महिला विशेष अन्तरा शब्द
शक्ति , अन्तरा शब्द शक्ति होली रंगारंग काव्य साझा संग्रह
वर्तमान अंकुर ,हिन्दी मैट्रो ,पत्रिका स्पंन्दन ,जय विजय पत्रिका और अनेक
ई पुस्तको मे प्रकाशित।
मेरा पता है
फोन न.
7011043322
बबिता कंसल
Babita consul
Pankaj Consul, S-469/10,
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