जिज्ञासु बंटी
सूर्य को अर्घ्य देते देख बंटी ने माँ से पूछा,
"माँ आप रोज सूर्य को पानी क्यों देती हो ?"
"क्योंकि सूर्य देवता हैं।"
"लेकिन हमारी मेम तो कहती हैं सूर्य एक तारा है फिर...."
जोर से बोलते हुए "बस एक सवाल का जवाब दिया नहीं कि दूसरा तैयार। मुझे और भी काम करने है।"
"बहू जवाब नहीं दोगी तो उसकी जिज्ञासा कैसे शांत होगी।" दादी ने कहा
"बंटी इधर आओ मैं बताती हूँ।"
"सूर्य तो बड़ा तारा है न दादी, फिर देवता कैसे हुए।"
"जैसे गाय हमें दूध देती है तो हम उसे गौमाता कहते हैं न, वैसे ही सूर्य हमें और पेड़-पौधों को उर्जा देता है इसलिए उसे देवता कहते हैं।"
"फिर तुलसी के पौधे को माता क्यों कहते हैं ?"
"तुलसी के पौधे में बहुत से औषधीय गुण है जो हमें की बीमारियों से बचाते हैं।"
"ओह ! इसीलिए माँ रोज चाय में तुलसी की पत्तियां डालती है।"
"अगर पौधे न हो तो जीवन मुश्किल हो जाएगा पौधों से हमें अनाज,फल और भी बहुत सी चीजें मिलती हैं। पौधे हमारे सबसे अच्छे मित्र हैं दादी ने समझाते हुए कहा।"
"पर दादी माँ तो रोज पीपल को भी जल देती है जबकि पीपल न तो फल देता है और न ही यह कोई दवा के काम आता है।"
"अच्छा बताओ हम सांस लेने के लिए किस गैस का इस्तेमाल करते हैं।"
"आक्सीजन" बंटी ने तपाक से उत्तर दिया
"तो यह आक्सीजन हमें कहाँ से मिलती है।"
"अरे! दादी आपको इतना भी नहीं मालूम पेड़ पौधों से।"
दादी ने मुस्कुराते हुए कहा "सब पेड़ों में यही पीपल का पेड़ है जो सबसे ज्यादा आक्सीजन हमें देता है।"
बंटी ने पीपल की ओर देखते हुए हाथ जोड़ लिए।
मधु जैन
लघुकथा
पेट सबके हैं
झोले में सब्जियों को रखते देख:
"भूल गये क्या? आज लाॅक डाउन है।"
बड़बड़ाते हुए:
"काश पेट का भी लाॅक डाउन होता।"
"याद नहीं पिछले इतवार बिक्री तीन सौ की हुई थी और पुलिस वालों ने जुर्माना के पांच सौ ले लिए थे।"
"हां! सब याद है, इसीलिए तो ठेले पर नहीं साइकिल पर रेहड़ी लगा रहा हूं।"
"वो तो ठीक है पर फिर......."
"सब्जियां भी तो सड़ जाएंगी और कमाऊंगा नहीं तो अपना और तुम लोगों का पेट कैसे भरुंगा?"
अभी बिक्री दो सौ की ही हुई थी वह "आलू, प्याज, टमाटर, धनिया, मिर्ची ले लो।"
आवाज लगा ही रहा था, कि सामने से लाठी ठोकता पुलिस वाला आता दिखाई दिया। वह घबरा रहा था,पैर तो जैसे जड़ हो गये हो हिल ही नहीं रहे थे। चेहरे का रंग भी उड़ गया था। पुलिस वाले के पास आते ही वह कांपने लगा।
"क्या भाई? सब्जी बेच रहे हो।"
रोबीली आवाज में पुलिस ने पूछा।
हकलाते हुए:
"वो.... वो..... "आगे आवाज ही न निकली।
कंधे पर हाथ रखते हुए:
"जा बेच ले, पेट तो सबके लगे हैं।"
कहते हुए पुलिस वाला आगे बढ़ गया।
वह बार-बार पलट के देखता रहा। उसे उसकी वर्दी पर शक जो हो रहा था।
मधु जैन
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