शुक्रवार, 9 अक्टूबर 2020

लघुकथा : तो कुछ और बात होती





लघुकथा 

       प्रेम के  ज्वार भाटे में उमड़ता घुमड़ता उसका मन उसे किस राह ले जाएगा वह समझ नहीं पा रहा था। 


     आज उसे महसूस हो रहा था, जीवन बीतने को है। लेकिन उसने प्रेम किया ही नही। 


       पत्नी रोते गाते परलोक चली गई। 

    बच्चों ने भी अपनी राह थाम ली थी। 


         पद / प्रतिष्ठा और धन  पाने में प्रेम तो वह भूल ही गया। प्रेम कभी किया ही नहीं। या प्रेम कभी हुआ ही नहीं। 


     लज्जा को कैसे त्याग सकता हूं। यह सोचते सोचते सारा दिन बीत गया है। 


      शाम होते होते मेज़ पर रखा मोबाइल प्रकाशमान हो गया। उसने स्क्रीन टच किया और कानों से लगा लिया। 

सुरीली आवाज़ ने स्वागत किया: 

    " प्रियवर !  याद है, आज आपका निर्णय का दिन है।" 


       "जूही! अवश्य याद है। आज मैने सही अर्थ में नश्वर संसार को जाना है। मै तुमसे विवाह कर रहा हूं प्रिये। 


* उदय श्री ताम्हने 

भोपाल मध्यप्रदेश