शुक्रवार, 6 नवंबर 2020

दिल जलता है, तो जलने दे लघुकथाकार उदय

 लघुकथा 

दिल जलता है तो, जलने दे 


विरेन्द्र और सुरेश दोनों किसी कार्यालय में मित्र  हुए। 

विरेन्द्र ने साम, दाम, दण्ड, भेद नीति को अपनाया और वैभव को उपलब्ध किया। 


सुरेश संतोष, सद्भावना की नीति पर अडिग रहा। सामान्य जीवन व्यतीत करता रहा। 


 किसी कार्यालयीन प्रक्रिया के तहत आदेश दिया गया कि  विरेन्द्र और सुरेश दोनों के वेतन से प्रति माह रुपए पांच हजार की वसुली की जाएगी। 


विरेन्द्र अपने बिगड़ते बजट से चिंतित हुआ। तो सुरेश शांत गंभीर रूप में अपने कार्य में संलग्न था। 


उदय श्री ताम्हणे 

भोपाल मध्यप्रदेश भारत