शनिवार, 7 नवंबर 2020

लघुकथा : आँसू

लघुकथा 

आँसू 

साभार नेटवर्क 


     टन, टीन, टन मंदिर के घंटे की आवाज ! 

रामू झटपट उठ बैठा ! बड़ी-सी थाल मे आटा गूँथा ! चूल्हा जलाकर तेल की कड़ाही उसपर रखी ! आटे से फुलकीया बनाई और गर्म तेल से अपना हाथ बचाते हुये उसमे एक-एक फुलकी डालने लगा ! कड़ाही मे फुलकीया फुल-फुल जा रही थी ! डलिया मे उनको जमाया ! 

मटके के पानी मे तैयार किया अपना स्वादिष्ट मसाला घोला, उसमे एक नींबू काट कर निचोड़ा ! 

अब रामू चल पड़ा सपने बुनते हुए ! आज नेता जी की चुनावी सभा मे सारी फुलकीया हाथो हाथ बिकना है ! 

रामू सभा स्थल के पास पहुँचकर खोमचा लगा कर बैठ गया था ! 

मंच पर नेता जी चढ़े ! तालियों की गड़-गड़ाहट हुई ! अचानक कही से एक जूता उछला विजय कुमार के चश्मे से टकराया और चश्मे सहित मंच पर आ गिरा ! चश्मे की खरोच से उनकी नाक लाल हो गई थी ! विजय कुमार, मुर्दाबाद ......के नारों के साथ काले-काले पताके लहराने लगे! 

प्रशासन माइक पर भीड़ को तितर-बितर करने के लिए आँसू गेस छोडने की घोषणा करने लगा ! 


उदय श्री. ताम्हणे 



भोपाल मध्यप्रदेश भारत