गुरुवार, 5 नवंबर 2020

अनमना लघुकथाकार उदय श्री ताम्हणे

लघुकथा 


            'वह' अनमना - सा  कहीं से आकर अब पार्क की बेंच पर बैठ गया था। 

       'वह' बहुत नाराज़ दिखाई पड़ रहा था। कुछ अपने से कुछ दुसरों से भी। 

       उसे सिर में दर्द तो नहीं था। फिर भी वह बार - बार माथे को दबा रहा था या फिर सहला रहा धा। 

     शरीर गर्म-सा था लेकिन उसने कोई विशेष दवाईयां भी नहीं ली थी। 

         उसके सारे कार्य में हाथों की भूमिका अहम थी। ख़ासतौर पर उंगलियां वह उन्हे बार-बार साफ कर रहा धा। 

           उसने नाक और मुंह को ढक कर रखा था। लेकिन वह लम्बी गहरी साँस दिल से खींचकर धीरे- धीरे नथुनों से छोड़ने का उपक्रम कर रहा था।

         लोगों ने कहा : "किसी 'वायरस' का प्रकोप है।" 


उदय श्री ताम्हणे 

भोपाल मध्यप्रदेश भारत