शुक्रवार, 4 दिसंबर 2020

श्रीपाद श्रीनिवास ताम्हणे


लघुकथा 

लेकिन 







बस से बस स्टेण्ड पर उतरते ही, एक लगभग १४-१५ वर्षीय बालक मेरे पास आया ! वह बोला : 

    'बाबूजी सामान ले चलू' ?मैंने कहां : 'नहीं' ! 

      मैं बस से सामान उतरवाकर आगे बढ़ा! वह बालक फिर मेरे सामने आ गया। 

 'बाबूजी ! आपका सामान ले चलू ! 

 दिन भर से कुछ नहीं मिला है' ! 

मैंने सोचा, ले चलने दो बेचारे को....! 

 और हाथ की अपनी छोटी - सी अटेची उसे पकड़ा दी ! 

    वह बालक मेरे पीछे - पीछे चलने लगा ! 

 मैं पहले दरवाजे की ओर बढ़ा ! 

वह बोला : ' नहीं बाबूजी ! 

इस दरवाजे से नहीं दूसरे दरवाजे से चलो' ! 

नहीं मुझे बस स्टॉप जाना है,  वह यही से पास पड़ेगा, मैंने कहां ! 

वह मेरे पीछे -पीछे आ गया !बस स्टॉप पर पहुंच कर मैंने उसे दो रूपये दिए ! 

 फिर सोचा दिन भर से कुछ नहीं मिला कह रहा था ! 

 मैंने उसे दो रूपये और दिए ! पैसे लेकर वह चल दिया ! 

तभी मैंने देखा दो 'दादा' टाइप युवको ने उस बालक से 'ला-बे आज की मजदूरी' कहते हुए पैसे छीन लिए ! 

अब मैं समझ गया वह बालक पहले दरवाजे से जाना क्यों नहीं चाहता था ! 

 मैं उन दादाओं से झगड़ना चाहता था, लेकिन .... 


श्रीपाद श्रीनिवास ताम्हणे