लघुकथा
लेकिन
बस से बस स्टेण्ड पर उतरते ही, एक लगभग १४-१५ वर्षीय बालक मेरे पास आया ! वह बोला :
'बाबूजी सामान ले चलू' ?मैंने कहां : 'नहीं' !
मैं बस से सामान उतरवाकर आगे बढ़ा! वह बालक फिर मेरे सामने आ गया।
'बाबूजी ! आपका सामान ले चलू !
दिन भर से कुछ नहीं मिला है' !
मैंने सोचा, ले चलने दो बेचारे को....!
और हाथ की अपनी छोटी - सी अटेची उसे पकड़ा दी !
वह बालक मेरे पीछे - पीछे चलने लगा !
मैं पहले दरवाजे की ओर बढ़ा !
वह बोला : ' नहीं बाबूजी !
इस दरवाजे से नहीं दूसरे दरवाजे से चलो' !
नहीं मुझे बस स्टॉप जाना है, वह यही से पास पड़ेगा, मैंने कहां !
वह मेरे पीछे -पीछे आ गया !बस स्टॉप पर पहुंच कर मैंने उसे दो रूपये दिए !
फिर सोचा दिन भर से कुछ नहीं मिला कह रहा था !
मैंने उसे दो रूपये और दिए ! पैसे लेकर वह चल दिया !
तभी मैंने देखा दो 'दादा' टाइप युवको ने उस बालक से 'ला-बे आज की मजदूरी' कहते हुए पैसे छीन लिए !
अब मैं समझ गया वह बालक पहले दरवाजे से जाना क्यों नहीं चाहता था !
मैं उन दादाओं से झगड़ना चाहता था, लेकिन ....
श्रीपाद श्रीनिवास ताम्हणे

