रविवार, 7 फ़रवरी 2021

चमत्कार लघुकथाकार ज्ञानप्रकाश 'पीयूष'

परिचय 

ज्ञानप्रकाश 'पीयूष' का जन्म 10.07.1955 को हुआ। इनकी 

माता श्रीमती रामेश्वरी देवी और पिता श्री रामेश्वर दयाल हैं। एम.ए (हिंदी)एम.एड. में शिक्षा के उपरांत ये राजकीय सेवा में प्रिंसिपल पद पर कार्य करते हुए अब सेवा निवृत्त हो चुके हैं। ज्ञानप्रकाश 'पीयूष' की रचनाएँ हरिगन्धा, मधुमती, शिविरा, प्राची प्रतिभा, साहित्य प्रभा, सोच विचार, शब्द-सरोकार,शुभ तारिका, अदबनामा, अनन्तिम, सरस्वती-सुमन,शैल- सूत्र, पुष्पगंधा, संगिनी,साहित्य गुंजन, केंद्रभारती, हिंदी ज्योतिष-बिम्ब, 

जगमग दीपज्योति आदि पत्रिकाओं में निरंतर प्रकाशन होती रहती हैं। 

प्रकाशित पुस्तकें- 

काव्य संग्रह-1. अर्चना के उजाले, 2. साथी हैं संवाद मेरे, 3. रूप देवगुण की कहानियों में नारी के विभिन्न रूप (समीक्षात्मक पुस्तक) 4.राजकुमार निजात की शिक्षाप्रद जीवनोपयोगी सूक्तियाँ (संपादित पुस्तक) 5. लघुकथा मञ्जूषा (सम्पादित पुस्तक), 6. पीयूष सतसई (दोहा संग्रह) 

7.समालोचना के सोपान(समीक्षात्मक पुस्तक)

8.रूप देवगुण की लघुकथाओं में यथार्थ व आदर्श 

(समीक्षात्मक अध्ययन) 

सम्मान- ज्ञान प्रकाश पीयूष' को साहित्य व समाजिक योगदान के लिए, उत्कृष्ट शिक्षाविद् समाज सेवी सम्मान, श्रेष्ठ शिक्षक साहित्यकार सम्मान,सूर्यकांत त्रिपाठी निराला साहित्य सम्मान, 

 डॉ. महाराज कृष्ण जैन स्मृति सम्मान', 'नीरज साहित्य रत्न सम्मान', 'निर्मला स्मृति हिन्दी साहित्य रत्न सम्मान' आदि  अनेक सम्मान मिले हैं।

 पता-

ज्ञानप्रकाश 'पीयूष' आर.ई.एस.

पूर्व प्रिंसिपल,

1/258, मस्जिद वाली गली, 

तेलियान मोहल्ला,नजदीक सदर बाजार सिरसा-125055(हरि.) संपर्क--094145-37902,070155-43276

ईमेल-gppeeyush@gmail.com6


         'चमत्कार' लघुकथा


            ज्ञानप्रकाश 'पीयूष'


            प्यारी-सी बिटिया अमिता को जन्म देने के दो महीने बाद उसकी माँ विभावना को बुखार चढ़ आया। गले में खराश व सांस लेने में तकलीफ होने लगी। टैस्ट करवाने पर रिपोर्ट कोरोना पॉजिटिव आ गई। उसको घर पर ही 14 दिन के लिए क्वारंटीन कर दिया गया।

बेबी सहित घर के अन्य परिजनों की भी जाँच करवाई गई।

शुक्र है भगवान का, सभी की रिपोर्ट नॉर्मल आई। मगर सबसे उग्र समस्या दो माह की बेबी अमिता की थी। वह अब तक माँ के दूध पर ही पल रही थी। अपनी माँ से अलग रहना और बोतल का दूध पीना उसे अच्छा नहीं लगता। रो-रो कर उसका बुरा हाल हो जाता। उधर अपनी बिटिया अमिता की रोने की आवाज़ सुन कर विभावना भी व्याकुल हो जाती। वह भी रोने लगती। 

कोरोना के कारण माँ और बेटी एक दूसरे से दूर रहने के लिए अभिशप्त थीं। 

62 वर्षीय दादी पर अब अपनी पोती अमिता को सम्भालने की पूरी जिम्मेदारी आ गई थी। वह उसका पूरा ध्यान रखती,उसका खूब लाड़ लड़ाती। नई नई आवाज़ें निकाल कर नन्हीं जान को बहलाने का प्रयास करती। लोरी सुनाती। बोतल से दूध पिलाने की कोशिश भी करती पर अमिता पर इन सबका कुछ भी असर नहीं होता। वह रोती ही रहती। अंतिम प्रयत्न के रूप में दादी, अमिता को अपने पास लिटा कर उसके मुख में अपना स्तन डाल देती। अमिता पर इसका जादू-सा असर होता, वह चुप हो जाती, स्तन को चूसते-चूसते सो जाती। दादी को भी आनन्द की अनुभूति होती। उसके अंदर सोया ममत्व व वात्सल्य का सागर हिलोरें लेने लगता। दादी को लगता मानो उसके स्तनों में पुनः दूध उतर आया है।

 शुभेच्छु-

पता-

ज्ञानप्रकाश 'पीयूष'

सिरसा (हरियाणा)

94145 37902