रविवार, 9 मई 2021

संस्मरण (07) प्रेरणा गुप्ता, उत्तरप्रदेश

   दिल को मथने वाला बहुत ही मार्मिक वाक़या लेखिका ने प्रस्तुत किया है। पढ़िए- 


संस्मरण 

क्षमा याचना 


      यह घटना उन दिनों की है, जब मैं आठ-नौ वर्ष की रही होऊँगी। घर में बाहर से मेहमान आए हुए थे। उन्हें घुमाने के लिए मेरे मम्मी-पापा हम सबको साथ लेकर विंढम फाॅल के लिए रवाना हो लिए। ये झरना मिर्जापुर में स्थिति है, जो अपनी खूबसूरती के लिए बेहद प्रसिद्ध है। वहाँ दूर-दूर से लोग पिकनिक मनाने आते हैं। हम सभी खाना-पीना करके वहाँ से लौटने के लिए चट्टानों पर बनी सीढियाँ चढ़कर जैसे ही वापस ऊपर पहुँचे। वहाँ एक अँधा भिखारी एल्युमिनियम का कटोरा लिए बैठा दिखाई दिया। मेहमानों में मेरी ही हमउम्र एक बच्चा भी मेरे साथ था, वह मुझसे बोला, "जरूर ये भिखारी अँधे होने का नाटक कर रहा है, वो भी ऐसी सुनसान जगह पर ...!"

       मैंने कहा, "रुको, मैं अभी चैक करती हूँ।" मैंने झट वहाँ सड़क पर बिछी कंकरीट में से एक कंकड़ उठाकर उसके कटोरे में डाल दिया। तब तक मेरे पापा भी हमारे पीछे-पीछे वहाँ पहुँच चुके थे। उन्होंने बिना कुछ कहे, मगर कसकर आँख दिखाई कि मैं भीतर तक सहम गयी और मुझे फौरन अपनी गलती का अहसास हो गया। मैंने झट कटोरे में से कंकड़ वापस उठा लिया। 

वो दिन और आज का दिन, जब भी मैं किसी भिखारी को भीख माँगते देखती हूँ, वो वाक़या मेरी आँखों के सामने जीवंत हो उठता है और मैं आत्मग्लानि से भर उठती हूँ। सोचती हूँ कि काश! उसी वक्त मैंने उससे माफी माँग ली होती। जैसा कि बचपन से ही हम सभी बच्चों को घर में सिखाया गया था कि गलती हो जाने पर फौरन क्षमा माँगनी चाहिए। कभी सोचती हूँ कि कंकड़ तो मैंने वापस उठा ही लिया था तो क्या भिखारी ने मुझे माफ न कर दिया होगा? वह जरूर आस-पास के गाँव का रहने वाला होगा और अपनी जरूरत पूरी करने के लिए वहाँ भीख माँगने आ जाया करता होगा। इस तरह के प्रश्न मुझे अक्सर बेचैन कर देते हैं। सुना है, जिसे हम दिल से याद करते हैं, मन के भाव तरंगित हो उस तक पहुँच जाते हैं। काश कि मेरी प्रार्थना भी उस तक पहुँच गयी हो ...। 


प्रेरणा गुप्ता - कानपुर

पता -
C/O,  एस. के. टेक्सटाइल,  
50/28, नौघड़ा,
कानपुर- (यू.पी)
पिन कोड – 208001
ईमेल – prernaomm@gmail.com
मोबाइल नम्बर –9793800751