लघुकथा
कोख का कर्ज
मोनिका उच्च स्तर की शिक्षा प्राप्त कर स्वदेश लौटी थी ! माता - पिता ने ही उसके सपनो को साकार करने के लिए उसे इंग्लैंड भेजा था ! एरोड्रम पर रिसेप्शन में ही मोनिका पिता से लिपट कर रो पड़ी ! अभी वह सम्भली ही थी की उसकी नजर कोने में खड़ी अपनी माता पर पड़ी !
बॉय पापा कह कर एक झटके के साथ वह पिता को छोड़ माता की ओर लपकी उसके चरण छुए ! माँ शांति देवी ने कंपकपाती उंगलिया उसके सर पर फेरी ! माँ - बेटी दोनों की आँखों से ख़ुशी के आंसू झरने लगे !
अचानक दूर खड़े पापा पर मोनिका लगभग बरस पड़ी कमऑन पापा ! आपको आना पड़ेगा ! पुरानी बातो को भूलना पड़ेगा !
वह दौड़ते हुए गई ओर अपने पापा का हाथ पकड़ कर खीचते हुए माता के पास लाई ! माँ शांति देवी ने नजरे उठाकर पापा डिसूजा की आँखों में झाँका ! डिसूजा सर का मन भर आया !
उन्होंने २५ बरस बाद अपनी बाहें फैला दी ओर शांति देवी को गले लगा लिया !
* उदय श्री. ताम्हणे
