लघुकथा
जो अशेष है
मेरे लघुकथा संग्रह को पढ़कर एक तरफ अलमारी में रखते हुए पत्नी ने कहा - "आपको कितने सम्मान मिले।"
मैंने कहा -
"आपने मेरा पूर्ण संग्रह मनोयोग से पढ़ा यही मेरा सम्मान है।"
उदय श्री ताम्हणे
भोपाल मध्यप्रदेश
इंदुमति और श्रीपाद श्रीनिवास की स्मृति को समर्पित साहित्यिक अव्यवसायिक ब्लाॅग पत्रिका