रविवार, 27 जून 2021

गद्य क्षणिका






लघुकथा 


जो अशेष है 


              मेरे लघुकथा संग्रह को पढ़कर एक तरफ अलमारी में रखते हुए पत्नी ने कहा  - "आपको कितने  सम्मान मिले।" 


मैंने कहा - 

         "आपने मेरा पूर्ण संग्रह  मनोयोग से पढ़ा यही मेरा  सम्मान है।" 


उदय श्री ताम्हणे  

भोपाल मध्यप्रदेश