सोमवार, 14 जून 2021

पुस्तकालय से

                



           लक्ष्मी हो, या अन्नपूर्णा, या हो सरस्वती । देवी तो देवी ही है। बसंती चांवल बनाए या बसंती रंग की खीर । स्वादिष्ट दोनो ही है।  मीन मेख निकालने वालो पर कटाक्ष करती हुई लघुकथा है "बसंती चांवल" ( प्रेरणा गुप्ता )

                 सात फेरों के तुरंत बाद वीणा का  ससुराल में गायन  भी न हुआ था कि रस्म अदायगी के नाम पर अग्नि परीक्षा की तैयारी हो गई।  बेहतरीन ताना बाना बुना है,  लेखिका ने देखिए।


सूरज डूबने से पहले  लघुकथा संग्रह  में प्रकाशित  प्रेरणा  गुप्ता की लघुकथा  बसंती चांवल