लघुकथा
सत्य ज्ञान
किसी समय एक ढोंगी नामक संत हुए।
अंतिम समय में उन्होंने शिष्यों से कहा "तुम लोग कुछ पूछना चाहते हो तो पूछो।"
तब एक शिष्य ने घबराते हुए कहा "महाराज जी ! यह बताए कि आपका शुद्ध निर्मल आचरण और आपका नाम ढोंगी आपको कभी असहज महसूस नहीं हुआ?"
संत ने कहा "तुम्हें यह अवश्य ही जानना चाहिए। सत्ता से वंचित रहे नेता की मन: स्थिती को देखे, जाने।
मुझे ढोंगी नाम देने वाले भी मेरे भक्त ही थे। अन्तर इतना ही है कि वे शीर्षासन की मुद्रा में खड़े हैं।"
उदय श्री ताम्हणे
भोपाल मध्यप्रदेश
