लघुकथा
गुलाबों
मिल का सायरन बज उठा गुलाबों ने घड़ी देखी दस बज रहे थे। गुलाबों ने मशीन में रंग भर दिया कपड़े पर छपाई का काम शुरू हो गया था। गुलाबों मंत्र मुग्ध होकर खूबसूरत साड़ी पर राधा कृष्ण गोपियों की नाचने वाली मुद्रा में साड़ी बनते हुए देख रही थी।
इस डिजाईन को गुलाबों ने बहुत मेहनत से तैयार किया था। बचपन में पिता के साथ खेल खेल में प्रिंटिंग ब्लाक बनाना सीखा था। इन ब्लाक से कपड़ों पर प्रिंट किया जाता था। वह अपने लिए रुमाल पर रंग से फूल पत्ती छापा करती थी।
गुलाबों! तुम्हारी साड़ी तैयार हुई है।
गुलाबों ने मुड़ कर देखा। और कहा
अनमोल सर! आज मेरी परीक्षा की घड़ी है। अगर साड़ी की डिमांड हुई तो उसे और भी ट्रेडिशनल लुक वाली साड़ी डिजाइन करने का मौका मिल सकता है।
इस बात को कंपनी के जी.एम. ने खुद कहा है।
गुलाबों मीटिंग शुरू होने वाली है। तुम्हें एडवांस में शुभकामनाएंँ ।
गुलाबों मुस्कुराते हुए बोली ...... बस कुछ ही क्षणों में मेरे द्वारा तैयार साड़ी मीटिंग में रखी जायेगी और इस के लिए एडवरटाइजिंग एजेंसी को भी बुलाया गया है। इसे लेकर में मीटिंग हाल में पहुंच रही हूँ।
अच्छा गुलाबों में चलता हूँ। कुछ और भी काम देखना है।
साड़ी को फिनिशिंग टच दिया जा रहा था।
गुलाबो कटिंग सेक्शन में पहुंची देखा कि साड़ी बैग में रखी जा चुकी है। बैग उठाकर गुलाबों के कदम मीटिंग हाल की तरफ बढ़ गए।
गुलाबो के मन में उथल-पुथल सी मची हुई थी। भगवान जाने क्या होगा ?
हाल में सभी लोग उपस्थित थे। साड़ी का स्क्रीन पर डिस्प्ले किया गया। साड़ी बेहद खूबसूरत बनी थी। सभी ने तालियाँ बजाकर गुलाबों के काम की सराहना की, साड़ी डिस्टीब्यूटर से उसे एक लाख साड़ियाँ बनाने का आर्डर मिला एडवरटाइजिंग एजेंसी ने गुलाबो को ही माडल के लिए चुना।
इस सब को देखते हुए कंपनी के प्रबंध निदेशक ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया। इस महिला दिवस पर गुलाबों को सम्मानित किया जाएगा और उसके काम को देखते हुए उसे साड़ी डिज़ायनिंग सुपरवाइजर की पोस्ट पर प्रमोशन किया जाता है। तालियों की गूंज सुनाई दे रही थी। गुलाबो की आँखे छलक उठी .... पिताजी अगर आप होते तो मेरा काम देखकर बहुत प्रसन्न हुए होते।
अर्विना गहलोत
पता
D9 सृजन विहार
एन टी पी सी मेजा
जिला प्रयागराज उत्तर प्रदेश
ashisharpit01@gmail.com
